Jackal And The Drum हिंदी पंचतंत्र स्टोरी: बहुत समय पहले की बात है। एक घने जंगल में गोमाया नाम का एक चालाक लेकिन भूखा सियार रहता था। कई दिनों से उसे कोई शिकार नहीं मिला था। वह जंगल में इधर-उधर भटक रहा था, किसी भी तरह कुछ खाने की तलाश में। भूख के कारण उसका शरीर कमज़ोर हो गया था और वह बहुत थका हुआ महसूस कर रहा था।
भटकते-भटकते गोमाया जंगल के उस हिस्से में पहुँच गया जहाँ कुछ समय पहले युद्ध हुआ था। वहाँ चारों ओर सन्नाटा फैला हुआ था और जगह-जगह अस्त्र-शस्त्र और ढह चुके शिविर बिखरे पड़े थे। अचानक उसकी नजर एक बड़े ढोल (ड्रम) पर पड़ी जो एक पेड़ के नीचे पड़ा था। वह ढोल सुनसान जंगल के बीचोंबीच रखा था।
जैसे ही तेज हवा चली, पेड़ की एक पतली डाली ढोल से टकराई और “ढम-ढम” की रहस्यमयी आवाज़ आई। भूखे सियार ने इस आवाज को सुना और चौंक गया। वह डर के साथ धीरे-धीरे उस ढोल के पास गया और उसे चारों ओर से देखने लगा। ढोल काफी बड़ा और मजबूत था।
सियार ने अपने पंजों से ढोल को हल्के से थपथपाया तो फिर वही गूंजती आवाज़ सुनाई दी। वह सोचने लगा, “शायद इस ढोल के अंदर कोई जानवर छिपा है। जो आवाज़ आ रही है, वह उसी की है। और अगर अंदर कोई जानवर है, तो वह मेरे लिए स्वादिष्ट भोजन बन सकता है।”
Jackal And The Drum हिंदी पंचतंत्र स्टोरी
लेकिन समस्या यह थी कि ढोल के ऊपर की चमड़ा इतनी मजबूत थी कि सियार उसे अपने पंजों और दांतों से फाड़ नहीं पा रहा था। उसे एक योजना सूझी।
सियार जानता था कि वह अकेले इस ढोल को नहीं खोल सकता, इसलिए उसने सोचा कि क्यों न किसी और जानवर का इस्तेमाल किया जाए। तभी उसने देखा कि पास में ही एक भूखा तेंदुआ घूम रहा है। सियार ने तेंदुए के पास जाकर मीठे शब्दों में कहा,
“महाराज, आपके जैसे बलवान और तेज पंजों वाले जानवर के लिए यह ढोल खोलना कोई मुश्किल काम नहीं। इस ढोल के अंदर जरूर कोई मोटा शिकार छिपा है। अगर आप चाहें तो इसे फाड़कर उस शिकार को पकड़ सकते हैं।”
भूखे तेंदुए को सियार की बात लुभावनी लगी। उसने बिना कुछ सोचे-समझे ढोल के ऊपर अपने भारी पंजे से जोरदार प्रहार किया। एक-दो वार में ही ढोल फट गया और अंदर का दृश्य स्पष्ट हो गया।
लेकिन जैसे ही ढोल खुला, तेंदुए को कुछ नहीं मिला। ढोल अंदर से पूरी तरह खाली था। तेंदुआ पहले हैरान हुआ और फिर गुस्से से कांपने लगा। उसने सियार की ओर गुस्से से देखा
और दहाड़ते हुए कहा,
“तूने मुझे मूर्ख बनाया! मेरे समय और मेहनत दोनों की बर्बादी की। अब जब मुझे भोजन नहीं मिला, तो मैं तुझे ही खा जाऊंगा।”
सियार डर के मारे कांपने लगा और भागने की कोशिश की, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। तेंदुआ उस पर झपटा और उसे मारकर खा गया।
कहानी से सीख (Moral of the Story):
बिना सोचे-समझे किसी भी चीज़ पर विश्वास करना और दूसरों को धोखा देने की योजना बनाना, अंत में स्वयं के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
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